Saturday, May 5, 2018

परमाणु समझौते पर इजरायल ने खोला ईरान के खिलाफ मोर्चा, नेतन्याहू की पीएम मोदी सहित कई नेताओं से वार्ता

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ईरान ने परमाणु कार्यक्रमों पर रोक लगाने को लेकर वर्ष 2015 में अमेरिका एवं पांच विश्वशक्तियों के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे जिसके बदले में उसे प्रतिबंधों से राहत मिली थी.





परमाणु समझौते पर इजरायल ने खोला ईरान के खिलाफ मोर्चा, नेतन्याहू की पीएम मोदी सहित कई नेताओं से वार्ता

भारत दौरे पर पहुंचे इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से नई दिल्ली में एक मुलाकात के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी. (फाइल फोटो)







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Thursday, May 3, 2018

'अगर अमेरिका परमाणु समझौते से हटता है तो ईरान भी इसका हिस्सा नहीं रहेगा'

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तेहरान: ईरान के शीर्ष नेता आयतुल्ला अली खामेनी के वरिष्ठ सलाहकार ने कहा है कि अगर अमेरिका परमाणु समझौते से हटने का फैसला करता है, तो ईरान भी विश्व शक्तियों के साथ हुए इस समझौते का हिस्सा नहीं रहेगा. सरकारी टेलीविजन वेबसाइट ने ईरान के विदेश नीति सलाहकार अली अकबर विलायती के हवाले से बताया, ‘‘अगर अमेरिका परमाणु समझौते से हटता है तो हम भी इस समझौते में नहीं बने रहेंगे.’’ ईरान ने परमाणु कार्यक्रमों पर रोक लगाने को लेकर वर्ष 2015 में अमेरिका एवं पांच विश्वशक्तियों के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे जिसके बदले में उसे प्रतिबंधों से राहत मिली थी. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस समझौते को ‘‘बेकार’’ बताते हुए इससे हटने की धमकी दी है. 12 मई को इस समझौते का नवीकरण होना है.


ब्रिटेन में ईरान के दूत ने परमाणु समझौता रद्द करने की चेतावनी दी
इससे पहले ब्रिटेन में ईरान के दूत ने कहा था कि अमेरिका के परमाणु समझौते से पीछे हटने की सूरत में ईरान भी इससे बाहर होने पर विचार कर सकता है. ब्रिटेन में ईरान के शीर्ष राजदूत हामिद बेदिनेजाद ने 3 मई को प्रसारित हुए एक साक्षात्कार में यह बात कही थी. हामिद ने कहा कि अगर अमेरिका 2015 में हुए इस समझौते से पीछे हटता है तो ईरान भी “अपनी पिछली स्थिति में लौटने के लिए तैयार है.” 


सीएनएन के साथ साक्षात्कार में ईरान के दूत ने कहा, “जब अमेरिका इस समझौते से बाहर हो जाएगा तो इसका मतलब होगा कि कोई समझौता बचा ही नहीं.” उन्होंने कहा, “ऐसा इसलिए होगा क्योंकि एक महत्त्वपूर्ण पक्ष ने संधि को निरस्त किया है और साफ तौर पर इसका उल्लंघन किया है.’’


ईरान समझौते से पीछे नहीं हटे अमेरिका : संयुक्त राष्ट्र
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान समझौते से पीछे नहीं हटने का आग्रह किया है. गुटेरेस ने बीबीसी को बताया कि यदि 2015 के ईरान समझौते को संरक्षित नहीं किया गया तो युद्ध का जोखिम है. ट्रंप इस समझौते के मुखर आलोचक रहे हैं. इस समझौते के तहत ईरान खुद पर लगे प्रतिबंधों को हटाने के बदले अपने परमाणु कार्यक्रम बंद करने पर सहमत हो गया था.


गुटेरेस ने बीबीसी को बताया कि ईरान समझौता एक महत्वपूर्ण राजनयिक जीत है और इसे बनाए रखना चाहिए. उन्होंने कहा, "हमें इसे तब तक बंद नहीं करना चाहिए, जब तक इसका कोई अन्य बेहतर विकल्प नहीं मिल जाता. हमने खतरनाक दौर में हैं." इजरायल ने हाल ही में खुफिया परमाणु दस्तावेजों का खुलासा कर ईरान पर दुनिया की नजरों से छिपकर अपने परमाणु कार्यक्रमों को जारी रखने का आरोप लगाया था.




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संयुक्त राष्ट्र का अमेरिका से आग्रह- ईरान समझौते से पीछे नहीं हटे

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संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान समझौते से पीछे नहीं हटने का आग्रह किया है. गुटेरेस ने बीबीसी को बताया कि यदि 2015 के ईरान समझौते को संरक्षित नहीं किया गया तो युद्ध का जोखिम है. ट्रंप इस समझौते के मुखर आलोचक रहे हैं .  इस समझौते के तहत ईरान खुद पर लगे प्रतिबंधों को हटाने के बदले अपने परमाणु कार्यक्रम बंद करने पर सहमत हो गया था. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि वह 12 मई तक फैसला करेंगे कि इस समझौते से अमेरिका जुड़ा रहेगा या नहीं.


गुटेरेस ने बीबीसी को बताया कि ईरान समझौता एक महत्वपूर्ण राजनयिक जीत है और इसे बनाए रखना चाहिए. उन्होंने कहा, "हमें इसे तब तक बंद नहीं करना चाहिए, जब तक इसका कोई अन्य बेहतर विकल्प नहीं मिल जाता. हमने खतरनाक दौर में हैं. " इजरायल ने हाल ही में खुफिया परमाणु दस्तावेजों का खुलासा कर ईरान पर दुनिया की नजरों से छिपकर अपने परमाणु कार्यक्रमों को जारी रखने का आरोप लगाया था. अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा कि इन दस्तावेजों से पता चलता है कि ओबामा के समय में हुआ परमाणु समझौता झूठ के पुलिंदों पर बना था.


फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी सहमत हैं कि ईरान के साथ मौजूदा परमाणु समझौता उसे परमाणु हथियार तैयार करने से रोकने का सर्वश्रेष्ठ तरीका है. गौरतलब है कि ईरान ने 2015 में अमेरिका, चीन, रूस, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन के साथ एक समझौता किया था, जिसके तहत ईरान खुद पर लगे प्रतिबंधों को हटाने के बदले में अपने परमाणु कार्यक्रम रोकने को तैयार हो गया था. 


अमेरिका ने की ईरान पर नए प्रतिबंधों की घोषणा
अमेरिका ने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को लेकर ईरान के खिलाफ मंगलवार (18 जुलाई) को नये प्रतिबंधों की घोषणा की. इस कार्यक्रम को वह पश्चिम एशिया के आतंकी समूहों को तेहरान की मदद के तौर पर देखता है.विदेश विभाग की ओर से घोषित प्रतिबंधों में 18 व्यक्तियों या संस्थाओं को निशाना बनाया गया है, जिन्हें ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम या रिपब्लिकन गार्ड का समर्थक समझा जाता है.


इससे पहले अमेरिका ने सोमवार (17 जुलाई) को कहा था कि ईरान दो वर्ष पहले अमेरिका और अन्य वैश्विक ताकतों के साथ किये गए ऐतिहासिक परमाणु करार का अनुपालन कर रहा है. हालांकि उसने साथ ही आगाह किया था कि नये प्रतिबंधों पर काम किया जा रहा है.




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'अगर अमेरिकी ने परमाणु समझौता तोड़ा, तो ईरान भी जवाबी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा'

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लंदन: ब्रिटेन में ईरान के दूत ने कहा है कि अमेरिका के परमाणु समझौते से पीछे हटने की सूरत में ईरान भी इससे बाहर होने पर विचार कर सकता है. ब्रिटेन में ईरान के शीर्ष राजदूत हामिद बेदिनेजाद ने गुरुवार (3 मई) को प्रसारित हुए एक साक्षात्कार में यह बात कही. हामिद ने कहा कि अगर अमेरिका 2015 में हुए इस समझौते से पीछे हटता है तो ईरान भी “अपनी पिछली स्थिति में लौटने के लिए तैयार है.”


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते से बाहर निकलने की धमकी दी थी. सीएनएन के साथ साक्षात्कार में ईरान के दूत ने कहा, “जब अमेरिका इस समझौते से बाहर हो जाएगा तो इसका मतलब होगा कि कोई समझौता बचा ही नहीं.” उन्होंने कहा, “ऐसा इसलिए होगा क्योंकि एक महत्त्वपूर्ण पक्ष ने संधि को निरस्त किया है और साफ तौर पर इसका उल्लंघन किया है.’’


खबरों के मुताबिक ट्रंप ने इस समझौते को रद्द करने की बात कही है जो ईरान और छह अन्य वैश्विक शक्तियों के बीच हुआ था. अमेरिका को 12 मई तक इस समझौते को अपना समर्थन नए सिरे से देना था, लेकिन ट्रंप ने इससे पहले ही समझौते से बाहर होने की बात कह दी थी.


ईरान समझौते से पीछे नहीं हटे अमेरिका : संयुक्त राष्ट्र
वहीं दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान समझौते से पीछे नहीं हटने का आग्रह किया है. गुटेरेस ने बीबीसी को बताया कि यदि 2015 के ईरान समझौते को संरक्षित नहीं किया गया तो युद्ध का जोखिम है. ट्रंप इस समझौते के मुखर आलोचक रहे हैं. इस समझौते के तहत ईरान खुद पर लगे प्रतिबंधों को हटाने के बदले अपने परमाणु कार्यक्रम बंद करने पर सहमत हो गया था.


अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि वह 12 मई तक फैसला करेंगे कि इस समझौते से अमेरिका जुड़ा रहेगा या नहीं. गुटेरेस ने बीबीसी को बताया कि ईरान समझौता एक महत्वपूर्ण राजनयिक जीत है और इसे बनाए रखना चाहिए. उन्होंने कहा, "हमें इसे तब तक बंद नहीं करना चाहिए, जब तक इसका कोई अन्य बेहतर विकल्प नहीं मिल जाता. हमने खतरनाक दौर में हैं."




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