Friday, May 4, 2018

Time Match of North Korea and South Korea । ZEE जानकारीः दोनों नेताओं की मुलाकात के एक हफ्ते बाद North और South Korea समय भी मिला

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पिछले हफ़्ते North Korea और South Korea ने अपनी 68 साल पुरानी दुश्मनी को भूलकर एक दूसरे से हाथ मिलाया था. अब करीब एक हफ़्ते बाद इन दोनों देशों ने अपनी घड़ियां मिला ली हैं. North Korea और South Korea के रिश्तों वाली घड़ी 68 वर्षों से रुकी हुई थी. लेकिन, अब वक़्त बदल गया है. दीवार पर टंगी दो घड़ियों की ये तस्वीर 29 अप्रैल 2018 की है. ये उसी Peace House की तस्वीर है, जहां North Korea के सुप्रीम लीडर किम जोंग उन और South Korea के राष्ट्रपति Moon Jae-in की मुलाकात हुई थी. अगर आप दोनों घड़ियों को ध्यान से देखेंगे, तो ये पाएंगे, कि दोनों के समय में आधे घंटे का अंतर है. 


बांई तरफ की घड़ी South Korea के मुताबिक 11 बजकर 45 मिनट का समय दिखा रही है. जबकि दांई तरफ की घड़ी में North Korea के मुताबिक 11 बजकर 15 मिनट का समय दिख रहा है. अब आधे घंटे के इस फर्क की वजह को समझिए. किम जोंग उन.. ने वर्ष 2015 में Pyongyang Time बनाया था. इसके तहत North Korea ने अपना मानक समय South Korea से 30 मिनट पीछे कर लिया था. यानी पिछले 3 वर्षों से North Korea का समय South Korea से आधे घंटे पीछे चल रहा था. 


किम जोंग उन.. ने ये फैसला इसलिए लिया था, क्योंकि उपनिवेश काल से पहले North Korea का यही Time Zone, हुआ करता था. सन 1910 से लेकर 1945 तक North Korea पर जापान का शासन था. और उस वक्त जापान ने North Korea के Time को Tokyo के बराबर करने के लिए उसे आधा घंटा आगे कर दिया था. वर्ष 1945 में जापान के अधिकार क्षेत्र से बाहर आने के बावजूद, North Korea का Time Zone वर्ष 2015 तक नहीं बदला गया. फिर किम जोंग उन.. ने इस समय को अपने इतिहास के मुताबिक ठीक किया.


27 अप्रैल 2018 को जिस वक्त नॉर्थ और साउथ कोरिया के नेताओं की हंसती-मुस्कुराती तस्वीरें दुनिया देख रही थीं. उस वक्त किम जोंग उन थोड़े उदास थे. क्योंकि, जिस कमरे में बैठकर वो South Korea के राष्ट्रपति का इंतज़ार कर रहे थे, उसी कमरे की दीवार पर ये दोनों घड़ियां टंगी हुई थीं. Media रिपोर्ट्स के मुताबिक, किम जोंग उन ने उस दिन ये कहा था, कि दीवार पर टंगी हुई घड़ियों में Seoul Time और Pyongyang Time देखकर उन्हें बहुत पीड़ा हुई. और उसी वक्त उन्होंने ये फैसला किया, कि दोनों देशों के रिश्तों को मज़बूत करने के लिए, घड़ियों का समय मिलाना ज़रुरी है.


North Korea की आधिकारिक समाचार एजेंसी KCNA के मुताबिक, किम जोंग उन ने South Korea के Time Zone के हिसाब से वक्त मिलाने के लिए, अपने देश की घड़ियों को 30 मिनट आगे करने का फैसला लिया. वहां की संसद ने भी South Korea के Time Zone को अपनाने पर अपनी मंज़ूरी दे दी थी. और अब से कुछ देर पहले दोनों देशों की घड़ियों का वक्त एक जैसा हो गया है. North Korea का समय भारत के मुकाबले 3 घंटे आगे चलता है. इसलिए वहां पर तारीख बदल चुकी है, वहां पर 5 मई की तारीख शुरू हो चुकी है. 


South Korea ने किम जोंग उन के इस फैसले की तारीफ की है और कहा है, कि इस प्रतीकात्मक कदम से दोनों देशों के रिश्ते और भी ज़्यादा मज़बूत होंगे. इसके लिए South Korea ने भी एक अहम फैसला लिया है. जिसके तहत, वो अपने सीमावर्ती इलाकों में North Korea के खिलाफ दुष्प्रचार के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले Loudspeakers को हटा लेगा. इन दोनों ही देशों ने, Propaganda करने के लिए अपनी सरहदों पर सैकड़ों लाउडस्पीकर्स लगाए हुए हैं. लेकिन अब इस समस्या का समाधान भी निकाल लिया गया है.




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2017-18 में सबसे ज्यादा 30% ट्रेनें लेट हुईं, रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने कहा- 15 दिन में सुधारें ढर्रा

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नई दिल्ली. वित्तीय वर्ष 2017-18 में देशभर की करीब 30 फीसदी ट्रेनें लेट रहीं हैं। ये भारतीय रेलवे का पिछले तीन सालों का सबसे खराब प्रदर्शन है। रेलवे के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल अप्रैल से इस साल मार्च तक 71.39% मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें समय पर संचालित हुईं, जबकि इससे पहले 2016-17 वित्तीय वर्ष में ये आंकड़ा 76.69% था। यानी सिर्फ दो सालों के अंदर भारतीय रेल की लेट ट्रेनों की संख्या 5.3% बढ़ी है। अधिकारियों का कहना है कि इसकी वजह रेलवे के निर्माण कार्य हैं। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्वनी लोहानी ने लेटलतीफी पर संज्ञान लेते हुए अधिकारियों से 15 दिन में ढर्रा सुधारने को कहा है।


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छत्‍तीसगढ़ बना पुलिस फोर्स में ट्रांसजेंडर्स को मौका देना वाला पहला प्रदेश

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पूरे देश में ट्रांसजेंडर्स को आगे बढ़ने के लिए प्रदेश सरकारें मौका दे रही हैं. इसी कड़ी में छत्‍तीसगढ़ का नाम भी जुड़ गया है. हमारे समाज मे महिला पुरुष के अलावा अब थर्ड जेंडर को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सरकार ने जो पहल की उसका असर अब सरकारी नौकरियों में देखने को मिल रहा है. सरगुजा में पुलिस आरक्षक की भर्ती के लिये 17 थर्ड जेंडर आवेदकों ने आवेदन किया है. बता दें कि पुलिस भर्ती में ऐसी पहल करने वाला छत्‍तीसगढ़ पहला राज्‍य बन गया है. 





छत्‍तीसगढ़ बना पुलिस फोर्स में ट्रांसजेंडर्स को मौका देना वाला पहला प्रदेश

फोटो साभार: ANI


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Thursday, May 3, 2018

अमरनाथ गुफा से बाबा बर्फानी की पहली तस्वीर सामने आई, इस बार 20 दिन ज्यादा चलेगी तीर्थयात्रा

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हिमालय में स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा से गुरुवार को बाबा बर्फानी की पहली तस्वीर सामने आई। गुफा में बर्फ से बने 12 फीट के प्राकृतिक शिवलिंग के दर्शन के लिए दक्षिण कश्मीर में तीर्थयात्रा की शुरुआत 28 जून से होगी। इस बार अमरनाथ यात्रा की अवधि 20 दिन ज्यादा होगी और यह रक्षाबंधन के दिन 26 अगस्त को खत्म होगी। इसके लिए देशभर के एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। यात्रा के दौरान जम्मू में 4 जगहों पर मौके पर भी रजिस्‍ट्रेशन की सुविधा उपलब्ध रहेगी।


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So This Is The Reason Of Terrible Storm - 75 की मौत: तो इस वजह से आया था भयानक तूफान, 2 दिन इन इलाकों में रहेगा असर

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स्काईमेट वेदर के मौसम विज्ञानी महेश पलावत ने बताया, सात राज्यों में आई भयानक आंधी के दो मुख्य कारण हैं। जम्मू एवं कश्मीर में बुधवार को आया नया पश्चिमी विक्षोभ और उत्तरी राजस्थान, हरियाणा एवं पंजाब में बना चक्रवाती हवा का क्षेत्र। यह पश्चिमी विक्षोभ पाकिस्तान की ओर से आया है। 

वैज्ञानिक पलावत के मुताबिक चक्रवाती हवा के क्षेत्र से दो जगहों पर हरियाणा और उत्तरी राजस्थान में गरजने वाले बादल बन गए। वहीं चक्रवाती हवा के क्षेत्र वाले इन इलाकों से पूर्व की ओर बिहार तक निम्न दबाव की रेखा बन गई। हरियाणा में बने गरजने वाले बादल आगे बढ़े और पूर्वी हरियाणा से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक जबरदस्त आंधी-बारिश ले आए। 

वहीं उत्तरी राजस्थान के गरजने वाले बादल अलवर आदि शहरों से होते हुए आगरा समेत पूरे मध्य उत्तर प्रदेश में आंधी ले आए। 100 किलोमीटर की रफ्तार से हवा चली। पेड़ गिरे और भारी तबाही हुई। राजस्थान में तो 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने का दावा किया जा रहा है। 

दो दिन रहेगा असर
तीन और चार मई के दौरान भी यह दबाव का क्षेत्र बना रहेगा, लेकिन तेज आंधी-तूफान की संभावना कम है। हालांकि पूरे मई में प्री मानसून सीजन में रह-रहकर देश के अलग-अलग इलाकों में आंधी तूफान आते रहेंगे।  

मौसम विभाग का अनुमान हुआ फेल
मौसम विभाग ने एक से चार मई के बीच पूर्वोत्तर भारत में आंधी का अनुमान लगाया था। वहीं राजस्थान समेत उत्तर भारत में आंधी-तूफान का कोई अलर्ट जारी नहीं किया था। हालांकि निजी मौसम एजेंसी जैसे स्काईमेट ने उत्तर भारत में आंधी की आशंका जाहिर की थी। 

क्यों आती है आंधी
राजस्थान भूमध्य रेख के इर्दगिर्द है। इस क्षेत्र में वायु मंडलीय दबाव कम होता है। दबाव सीमा से अधिक पहुंचने पर ठंडी शुष्क हवा जमीन की ओर आती है। वहीं जमीन की हवा ऊपर की ओर उठती है। हवा की रफ्तार ज्यादा होने पर यह आंधी बन जाती है।

क्या होता है निम्न दबाव का क्षेत्र
जिस क्षेत्र में वायु का दबाव आसपास के क्षेत्र से कम हो जाता है, उसे निम्न दबाव का क्षेत्र कहते हैं। इससे बारिश होती है। 

पश्चिमी विक्षोभ
भूमध्यसागर से उठी तूफानी हवा को पश्चिमी विक्षोभ कहते हैं। इससे उत्तर पश्चिमी भारत में शीत ऋतु में बर्फबारी होती है। वहीं मानसून के इतर गर्मियों और सर्दियों में इससे तेज हवाएं चलती हैं।


स्काईमेट वेदर के मौसम विज्ञानी महेश पलावत ने बताया, सात राज्यों में आई भयानक आंधी के दो मुख्य कारण हैं। जम्मू एवं कश्मीर में बुधवार को आया नया पश्चिमी विक्षोभ और उत्तरी राजस्थान, हरियाणा एवं पंजाब में बना चक्रवाती हवा का क्षेत्र। यह पश्चिमी विक्षोभ पाकिस्तान की ओर से आया है। 


वैज्ञानिक पलावत के मुताबिक चक्रवाती हवा के क्षेत्र से दो जगहों पर हरियाणा और उत्तरी राजस्थान में गरजने वाले बादल बन गए। वहीं चक्रवाती हवा के क्षेत्र वाले इन इलाकों से पूर्व की ओर बिहार तक निम्न दबाव की रेखा बन गई। हरियाणा में बने गरजने वाले बादल आगे बढ़े और पूर्वी हरियाणा से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक जबरदस्त आंधी-बारिश ले आए। 

वहीं उत्तरी राजस्थान के गरजने वाले बादल अलवर आदि शहरों से होते हुए आगरा समेत पूरे मध्य उत्तर प्रदेश में आंधी ले आए। 100 किलोमीटर की रफ्तार से हवा चली। पेड़ गिरे और भारी तबाही हुई। राजस्थान में तो 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने का दावा किया जा रहा है। 

दो दिन रहेगा असर
तीन और चार मई के दौरान भी यह दबाव का क्षेत्र बना रहेगा, लेकिन तेज आंधी-तूफान की संभावना कम है। हालांकि पूरे मई में प्री मानसून सीजन में रह-रहकर देश के अलग-अलग इलाकों में आंधी तूफान आते रहेंगे।  

मौसम विभाग का अनुमान हुआ फेल
मौसम विभाग ने एक से चार मई के बीच पूर्वोत्तर भारत में आंधी का अनुमान लगाया था। वहीं राजस्थान समेत उत्तर भारत में आंधी-तूफान का कोई अलर्ट जारी नहीं किया था। हालांकि निजी मौसम एजेंसी जैसे स्काईमेट ने उत्तर भारत में आंधी की आशंका जाहिर की थी। 

क्यों आती है आंधी
राजस्थान भूमध्य रेख के इर्दगिर्द है। इस क्षेत्र में वायु मंडलीय दबाव कम होता है। दबाव सीमा से अधिक पहुंचने पर ठंडी शुष्क हवा जमीन की ओर आती है। वहीं जमीन की हवा ऊपर की ओर उठती है। हवा की रफ्तार ज्यादा होने पर यह आंधी बन जाती है।

क्या होता है निम्न दबाव का क्षेत्र
जिस क्षेत्र में वायु का दबाव आसपास के क्षेत्र से कम हो जाता है, उसे निम्न दबाव का क्षेत्र कहते हैं। इससे बारिश होती है। 

पश्चिमी विक्षोभ
भूमध्यसागर से उठी तूफानी हवा को पश्चिमी विक्षोभ कहते हैं। इससे उत्तर पश्चिमी भारत में शीत ऋतु में बर्फबारी होती है। वहीं मानसून के इतर गर्मियों और सर्दियों में इससे तेज हवाएं चलती हैं।




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Wednesday, May 2, 2018

किसानों का ऐलान, शहरों में 10 दिन नहीं आने देंगे फल, सब्जी और दूध

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चंडीगढ़: सहकारी बैंकों का कर्ज नहीं चुका पाने पर किसानों पर पंजाब सरकार की ओर से कार्रवाई की बात कही गई है. इसके जवाब में पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के किसानों ने 1 से 10 जून तक अपने गांव को सील करने और शहरों में सब्जियां, फल और दूध की सप्लाई रोकने का ऐलान किया है. चंडीगढ़ में बुधवार को जुटे किसान नेताओं ने यह ऐलान किया है. किसानों के इस आंदोल की अगुवाई राष्ट्रीय किसान महासंघ कर रहा है. इस संगठन के अंदर में देशभर के 110 किसान संगठन आते हैं.


इतना ही नहीं किसानों ने ऐलान किया है कि जब तक कोई जरूरी काम नहीं होगा तब तक किसान गांव के बाहर शह नहीं जाएंगे. तीनों राज्यों में गांवों की सीमा को पूरी तरह सील कर दिया जाएगा. किसानों का कहना है कि सरकारें वादाखिलाफी कर रही है. न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को बढ़ाया नहीं जा रहा है, जिसके चलते किसानों को सीधा नुकसान हो रहा है. किसानों के इस आंदोलन को बीजेपी के पूर्व नेता यशवंत सिन्हा का भी समर्थन है.


किसान नेताओं ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि हम लंबे समय से स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रही है. सभी राज्य सरकारें अन्य सेक्टर के लोगों पर पैसे खर्च करती है, लेकिन किसानों की बेहतरी पर कोई ध्यान नहीं दे रही है. मजबूर होकर किसानों ने शहरों में सब्जियों, दूध और फल की सप्लाई रोकने का फैसला लिया है.


दिल्ली में आसमान छू सकती है महंगाई
दिल्ली के विभिन्न सब्जी मंडी एसोसिशन से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर किसान ऐसा करते हैं तो इसका सीधा असर पड़ेगा. उनका कहना है कि दिल्ली में करीब 40 फीसदी सब्जी हरियाणा और पंजाब से आते हैं. पंजाब-हरियाणा की सब्जियां मंडी में नहीं आने पर यूपी पर दबाव बनेगा, जिससे महंगाई बढ़ना तय है. बताया जा रहा है कि गर्मी शुरू होने के चलते पहले ही सब्जियों की आवक कम है और भाव तेज हैं. किसानों के आंदोलन के चलते ये और महंगे हो सकते हैं.


पंजाब सरकार ने दी किसानों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी
पंजाब सरकार ऐसे बड़े किसानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने की चेतावनी दी है, जिन्होंने क्षमता के बावजूद सहकारी बैंकों का कर्ज नहीं चुकाया है. राज्य के सहकारी मंत्री सुखजींदर सिंह रन्धावा ने कहा कि बड़े किसानों पर सहकारी बैंकों का 276 करोड़ रुपये का कर्ज बकाया है.


रंधवा ने यहां एक बयान में कहा, 'पहले चरण में, सहकारी बैंकों को मजबूत करने के लिए वसूली पर जोर दिया जायेगा तथा निजी बैंकों की तर्ज पर उन्हें कार्य की ओर प्रवृत्त किया जाएगा. वे चुककर्ता, जो बड़े किसान भी हैं, उनकी सूची तैयार की गई है और जिन्होंने रिण की एक भी किस्त का भुगतान नहीं किया है.’


उन्होंने कहा, 'हर महीने 20 बड़े किसानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाएगी औरइस बार उन 20 किसानों को शामिल किया गया है, जिन पर इस समय 10-12 करोड़ रुपये का बकाया राशि है.




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राष्ट्रपति कोविंद बोले-कैंपस में स्वतंत्र विचारों को बढ़ावा देना विश्वविद्यालयों की सर्वोच्च जिम्मेदारी

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नई दिल्लीः देश में किसी ना किसी मुद्दे पर किसी ना किसी विश्वविद्यालय से विरोध-प्रदर्शन की खबर आ ही जाती है. पिछले कुछ दिनों में देश के कई विश्वविद्यालयों से ड्रेस कोड और मोबाइल पर पाबंदी जैसे नियम लागू करने की खबरें सामने आई थी. देश के विश्वविद्यालयों को लेकर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बुधवार को नई दिल्ली में कहा कि विश्वविद्यालयों की सर्वोच्च जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करने की है कि उनके परिसर ऐसी जगहों के रूप में उभरे जहां स्वतंत्र अभिव्यक्ति एवं विचारों को बढ़ावा मिले , प्रयोगधर्मिता को प्रोत्साहित किया जाए और नाकामी का उपहास ना उड़ाया जाए.


उन्होंने राष्ट्रपति भवन में केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की बैठक के समापन सत्र में कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि विश्वविद्यालय अपने दीक्षांत समारोह नियमित रूप से एवं समय पर आयोजित करें क्योंकि दीक्षांत समारोह होने एवं डिग्रियां बांटी जाने तक एक साल का शैक्षणिक सत्र पूरा नहीं होता.


 



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कोविंद ने विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की कमी के मुद्दे को रेखांकित करते हुए कई सुझाव दिए. राष्ट्रपति ने कहा कि हर विश्वविद्यालय की प्रतिभाओं को आकर्षित करने की क्षमता उसकी खुद की प्रतिष्ठा एवं गुणवत्ता पर भी निर्भर करती है ‘‘ इसलिए अपने साथियों में सर्वश्रेष्ठ बनने के लिए प्रतिस्पर्धा करें और प्रतिभा आकर्षित करने और उन्हें अपने यहां बनाए रखने को लेकर आपकी सफलता स्वत : बेहतर हो जाएगी. ’’ 


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उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को देश के सामने मौजूद चुनौतियों से निपटने में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए जिनमें से कई के लिए रचनात्मक और नवोन्मेषी हल की जरूरत है. 


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कोविंद ने कहा , ‘‘ यह सुनिश्चित करना आपकी सर्वोच्च जिम्मेदारी है कि आपके परिसर ऐसी जगहों के रूप में उभरे जहां स्वतंत्र अभिव्यक्ति एवं विचारों को बढ़ावा मिले , प्रयोगधर्मिता को प्रोत्साहित किया जाए और नाकामी का उपहास ना उड़ाया जा बल्कि उन्हें सीखने की प्रक्रिया का ही हिस्सा माना जाए. ’’ 




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