Thursday, May 3, 2018

डोनाल्ड ट्रंप ने कबूला, पोर्न एक्ट्रेस को 'चुप' रहने के लिए दिए थे पैसे; प्रेम प्रसंग से किया इंकार

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वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार (3 मई) को इस बात की पुष्टि की है कि उन्होंने अपने निजी वकील माइकल कोहेन को 1,30,000 डॉलर की वह राशि वापस दे दी है जो कोहेन ने वर्ष 2016 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले उनकी ओर से पोर्न स्टार स्टॉर्मी डेनियल्स को चुप रहने के लिए दी थी. हाल ही में ट्रंप की कानूनी टीम का हिस्सा बने न्यूयॉर्क के पूर्व मेयर रुडोल्फ गिउलिआनि ने इस बात का खुलासा किया कि राष्ट्रपति ने व्यक्तिगत रूप से एक लाख 30 हजार डॉलर की रकम माइकल कोहेन को चुकाई थी, जो डेनियल को चुप रहने के लिये दी गई थी. उन्होंने ‘फॉक्स न्यूज’ के प्रस्तोता सियान हनीटी से एक साक्षात्कार में यह रहस्योद्घाटन किया था.


ट्रंप ने ट्वीट के जरिए की पुष्टि
इसके कुछ ही घंटे बाद ट्रंप ने इस बात की पुष्टि की. ट्रंप ने सुबह किये ट्वीट में कहा कि उनके निजी वकील कोहेन ने उनकी ओर से पोर्न स्टार डेनियल्स को चुप रहने के लिए धनराशि दी थी. राष्ट्रपति ने ट्विटर पर लिखा,‘‘उनके निजी वकील कोहेन को मासिक फीस के जरिये रकम दी गई और कोहेन ने डेनियल के चुप रहने के लिये जो समझौता किया था उसका अभियान से कोई लेना-देना नहीं था.’’



ट्रंप ने वकील को पैसे देने की बात से इनकार किया था
ट्रंप ने इससे पहले डेनियल को रकम का भुगतान किये जाने से इंकार किया था. इसके बाद न्याय विभाग और संघीय चुनाव आयोग में चुनाव प्रचार से संबंधित वित्तीय कानूनों के संभावित उल्लंघन को लेकर शिकायत दायर की गई थी.  ट्रंप ने अपने ट्वीट में कहा, ‘‘कोहेन को मासिक शुल्क प्रचार अभियान से नहीं मिला और इसका प्रचार अभियान से कोई लेना-देना नहीं था, जिससे उन्होंने प्रतिपूर्ति के बदले में दो पक्षों के बीच निजी समझौता किया था जिसे गैर खुलासा समझौता के तौर पर जाना जाता है.’’



ट्रंप ने दावा किया, ‘‘ये समझौते सेलिब्रिटी और धनवान लोगों के बीच बेहद आम बात हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘इस मामले में यह पूरी तरह प्रभावी है और इसका मिस क्लिफोर्ड (डेनियल्स) से क्षतिपूर्ति हासिल करने के लिये मध्यस्थता में इस्तेमाल किया जाएगा.’’


पैसे के लेनदेन का प्रेम संबंध से सरोकार नहीं
ट्रंप ने कहा कि इस समझौते का इस्तेमाल प्रेम संबंध के बारे में झूठे और वसूली वाले आरोप लगाने से रोकने के लिए किया गया. दोनों के बीच कोई प्रेम संबंध नहीं होने की बात स्वीकारने वाले विस्तृत पत्र पर हस्ताक्षर के बावजूद ऐसा किया गया. उन्होंने कहा कि मिस (डेनियल) क्लिफोर्ड और उनके वकील द्वारा इसका उल्लंघन किए जाने से पहले यह निजी समझौता था. प्रचार अभियान से जुटाया गए धन या चंदा की इस लेन-देन में कोई भूमिका नहीं थी.


व्हाइट हाउस की दलील अलग
फॉक्स न्यूज से बुधवार (2 मई) को बातचीत में गिउलिआनि ने कहा कि कोहेन को जो रकम चुकाई गई वह अभियान का धन नहीं था और भुगतान पूरी तरह कानूनी था. डेनियल्स ने ट्रंप और कोहेन पर मुकदमा दायर करते हुए कहा है कि यह गैरप्रकटीकरण समझौता अवैधानिक है क्योंकि ट्रंप ने इस पर हस्ताक्षर नहीं किये थे. इस बीच, व्हाइट हाउस ने कहा कि ट्रंप ने प्रेस प्रसंग से इनकार किया है.




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National Pension System Subscribers Can Withdraw Money For Business And Studies - खुशखबरी: नेशनल पेंशन सिस्टम में से निकाल सकेंगे बीच में पैसा

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नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) में अपने पैसे का निवेश करने वालों के लिए एक खुशखबरी है। पेंशन फंड की रेगुलेटरी संस्था पीएफआरडीए ने एनपीएस उपभोक्ताओं को उच्च शिक्षा लेने या नया बिजनेस चालू करने के लिए अपने निवेश में से कुछ हिस्सा निकालने के प्रस्ताव को हरी झंडी दिखा दी है। ये निर्णय पिछले सप्ताह पेंशन फंड और रेगुलेटरी डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीएफआरडीए) की बोर्ड बैठक में लिया गया है।
 
बता दें कि एनपीएस सरकार का मुख्य सोशल सिक्योरिटी प्रोग्राम है। इसका लाभ पीएफआरडीए से जुड़े 2.13 करोड़ उपभोक्ताओं को मिलेगा, जिनका करीब 2.38 लाख करोड़ रुपया इन योजनाओं के जरिए मार्केट में निवेश किया गया है।

एनपीएस और अटल पेंशन योजना का संचालन करने वाली पीएफआरडीए ने बृहस्पतिवार को एक बयान जारी कर कहा, नए स्किल सीखने के इच्छुक एनपीएस उपभोक्ताओं को अब उच्च शिक्षा लेने, प्रोफेशनल या तकनीकी क्वाफिकेशन हासिल करने के लिए अपने निवेश में से कुछ हिस्सा निकालने की छूट मिलेगी। इससे पहले नया बिजनेस शुरू करने या नया बिजनेस अधिग्रहित करने के इच्छुक एनपीएस उपभोक्ताओं को ही अपने निवेश में से कुछ हिस्सा निकालने की छूट मिलती थी। 

ये भी हुए फैसले
- निजी क्षेत्र के एनपीएस उपभोक्ता अब ‘सक्रिय विकल्प’ वर्ग में अपने निवेश का 75 प्रतिशत इक्विटी क्षेत्र में कर सकते हैं, पहले ये 50 प्रतिशत था
- 50 साल की उम्र तक ही मिलेगा इक्विटी में अपना निवेश बढ़ाने का उपभोक्ताओं को मौका
- कॉरपोरेट बांड में निवेश की रेटिंग को ‘एए’ से बदलकर ‘ए’ किया गया, पेंशन फंड के 10 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होगा ए-रेटिंग बांड में निवेश



नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) में अपने पैसे का निवेश करने वालों के लिए एक खुशखबरी है। पेंशन फंड की रेगुलेटरी संस्था पीएफआरडीए ने एनपीएस उपभोक्ताओं को उच्च शिक्षा लेने या नया बिजनेस चालू करने के लिए अपने निवेश में से कुछ हिस्सा निकालने के प्रस्ताव को हरी झंडी दिखा दी है। ये निर्णय पिछले सप्ताह पेंशन फंड और रेगुलेटरी डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीएफआरडीए) की बोर्ड बैठक में लिया गया है।


 
बता दें कि एनपीएस सरकार का मुख्य सोशल सिक्योरिटी प्रोग्राम है। इसका लाभ पीएफआरडीए से जुड़े 2.13 करोड़ उपभोक्ताओं को मिलेगा, जिनका करीब 2.38 लाख करोड़ रुपया इन योजनाओं के जरिए मार्केट में निवेश किया गया है।

एनपीएस और अटल पेंशन योजना का संचालन करने वाली पीएफआरडीए ने बृहस्पतिवार को एक बयान जारी कर कहा, नए स्किल सीखने के इच्छुक एनपीएस उपभोक्ताओं को अब उच्च शिक्षा लेने, प्रोफेशनल या तकनीकी क्वाफिकेशन हासिल करने के लिए अपने निवेश में से कुछ हिस्सा निकालने की छूट मिलेगी। इससे पहले नया बिजनेस शुरू करने या नया बिजनेस अधिग्रहित करने के इच्छुक एनपीएस उपभोक्ताओं को ही अपने निवेश में से कुछ हिस्सा निकालने की छूट मिलती थी। 

ये भी हुए फैसले
- निजी क्षेत्र के एनपीएस उपभोक्ता अब ‘सक्रिय विकल्प’ वर्ग में अपने निवेश का 75 प्रतिशत इक्विटी क्षेत्र में कर सकते हैं, पहले ये 50 प्रतिशत था
- 50 साल की उम्र तक ही मिलेगा इक्विटी में अपना निवेश बढ़ाने का उपभोक्ताओं को मौका
- कॉरपोरेट बांड में निवेश की रेटिंग को ‘एए’ से बदलकर ‘ए’ किया गया, पेंशन फंड के 10 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होगा ए-रेटिंग बांड में निवेश





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Rudolph Giuliani । पोर्न स्टार को चुप रहने के लिए वकील ने दिए थे 130000 डॉलर, डोनाल्ड ट्रंप ने वापस लौटाए पैसे

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न्यूयॉर्क के पूर्व मेयर रुडोल्फ गिउलिआनि हाल ही में ट्रंप की कानूनी टीम का हिस्सा बने हैं. उन्होंने ‘फॉक्स न्यूज’ के प्रस्तोता सियान हनीटी से एक साक्षात्कार में यह रहस्योद्घाटन किया.





पोर्न स्टार को चुप रहने के लिए वकील ने दिए थे 130000 डॉलर, डोनाल्ड ट्रंप ने वापस लौटाए पैसे

पोर्न स्टार स्टॉर्मी डेनियल और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप.







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Wednesday, May 2, 2018

10 महीने बाद भारत-चीन व्यापार के लिए खोला गया नाथू ला पास, डोकलाम मुद्दे के चलते हुआ था बंद

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भारत-चीन व्यापार के लिए सिक्किम का नाथू ला पास आखिरकार 10 महीने बाद बुधवार को खोल दिया गया। डोकलाम विवाद के चलते इसे जुलाई में बंद कर दिया गया था। नाथू ला के शुरू होने पर दोनों तरफ के अधिकारियों और व्यापारियों एक-दूसरे को मिठाई और गिफ्ट बांटे। बता दें कि पिछले साल 16 जून को भारत-चीन के बीच डोकलाम विवाद शुरू हुआ था। 73 दिन चला विवाद 28 अगस्त 2017 को हल हो गया था।


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Tuesday, May 1, 2018

अगर कॉलेजियम ने जस्टिस जोसेफ की फाइल दोबारा सरकार के पास भेजी तो क्‍या होगा?

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नई दिल्‍ली: सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के बावजूद सरकार ने 28 अप्रैल को उत्तराखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस केएम जोसेफ के नाम की फाइल को पुनर्विचार के लिए वापस लौटा दिया. उसके बाद दो मई को कॉलेजियम फिर से जस्टिस जोसेफ के नाम पर विचार के संबंध में बैठक करने जा रही है. इसके साथ ही बड़ा सवाल यह उठता है कि यदि कोर्ट ने सरकार की आपत्तियों के बावजूद जस्टिस जोसेफ के नाम की फिर से सिफारिश की तो क्‍या होगा?


वैसे तो आमतौर पर सरकारें कॉलेजियम की सिफारिशों को मानती रही हैं. ऐसा यदा-कदा ही हुआ है कि सरकारों ने सुप्रीम कोर्ट के सुझाव किसी नाम पर आपत्ति उठाई हो. इस मामले में कानून के जानकारों के मुताबिक यदि जस्टिस केएम जोसेफ के नाम को दोबारा कॉलेजियम सरकार के पास विचार के लिए भेजती है तो सरकार को इस फैसले को मानना ही होगा.


कॉलेजियम
सुप्रीम कोर्ट के पांच सबसे सीनियर जजों की कमेटी होती है जो जजों की नियुक्तियों और प्रमोशन के संबंध में फैसले लेती है. इस वक्‍त चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस जे चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस बी लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ कॉलेजियम के सदस्‍य हैं. इन सभी जजों की उपस्थिति में लिए गए निर्णयों को सरकार के पास भेजा जाता है. सरकार संबंधित फाइल को राष्‍ट्रपति के पास भेजती है. उसके बाद राष्‍ट्रपति कार्यालय जज की नियुक्ति के संबंध में अधिसूचना जारी कर देता है और इस तरह नियुक्ति हो जाती है.


km joseph
सुप्रीम कोर्ट के पांच सबसे सीनियर जजों की कमेटी होती है जो जजों की नियुक्तियों और प्रमोशन के संबंध में फैसले लेती है.(फाइल फोटो)


जस्टिस केएम जोसेफ
सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में दो नामों को सुप्रीम कोर्ट में जज के रूप में प्रोन्‍नत करने के लिए भेजा था. इंदु मल्होत्रा सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता थीं. सरकार ने इंदु मल्होत्रा के नाम पर तो मंजूरी दे दी और पिछले शुक्रवार को उन्‍होंने कार्यभार ग्रहण कर लिया लेकिन जस्टिस जोसेफ की फाइल को फिर से विचार करने की बात कहते हुए लौटा दिया था.


इस मसले पर राजनीति भी खूब हुई है. विपक्षी कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए सवाल किया था कि क्या दो साल पहले उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन के खिलाफ फैसले की वजह से जस्टिस केएम जोसेफ के नाम को मंजूरी नहीं दी गई? दरअसल 2016 में उत्तराखंड में कांग्रेस की हरीश रावत सरकार के शासन के दौरान राजनीतिक संकट खड़ा हो गया था. इस पर मोदी सरकार ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश कर दी थी. इस फैसले के खिलाफ कांग्रेस ने हाई कोर्ट में गुहार लगाई और हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार की सिफारिश को नामंजूर कर दिया था और यह फैसला सुनाने वाले जस्टिस जोसेफ ही थे. इसी कारण राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जस्टिस जोसेफ को उसी फैसले की सजा मिली है.


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जस्टिस कुरियन कॉलेजियम के सदस्‍य हैं और इसी नवंबर में रिटायर होने वाले हैं.(फाइल फोटो)


जस्टिस कुरियन का CJI को खत
कॉलेजियम की सिफारिशों के बावजूद सरकार के रवैये पर नाराजगी जाहिर करते हुए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस और कॉलेजियम के सदस्‍य जोसेफ कुरियन ने पिछले दिनों चीफ जस्टिस(CJI) दीपक मिश्रा को पत्र भी लिखा था. इसी संदर्भ में जस्टिस जोसेफ कुरियन ने चीफ जस्टिस से सख्‍त शब्‍दों में अपील करते हुए कहा था, ''इस कोर्ट के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि तीन महीने बीत जाने के बावजूद की गई सिफारिशों का क्‍या हुआ, इस बारे में कोई जानकारी नहीं है.''


जस्टिस कुरियन ने सीजेआई से तत्‍काल हस्‍तक्षेप करने की अपील करते हुए यह भी कहा, ''गर्भावस्‍था की अवधि पूरी होने पर यदि नॉर्मल डिलीवरी नहीं होती तो सिजेरियन ऑपरेशन की तत्‍काल जरूरत होती है. यदि सही समय पर ऑपरेशन नहीं होता तो गर्भ में ही नवजात की मौत हो जाती है.''  इसके साथ ही जस्टिस कुरियन ने यह चेतावनी भी दी, ''इस कोर्ट की गरिमा, सम्‍मान और आदर दिन-प्रतिदिन कम होता जा रहा है क्‍योंकि इस कोर्ट की अनुशंसाओं को अपेक्षित समयावधि के भीतर हम तार्किक निष्‍कर्षों तक पहुंचाने में सक्षम नहीं रहे हैं.''


सरकार की प्रतिक्रिया
इस बीच जस्टिस जोसेफ के नाम की फाइल लौटाते समय सीजेआई दीपक मिश्रा को लिखे पत्र में केंद्रीय विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि न्यायमूर्ति जोसफ का नाम सरकार की ओर से पुनर्विचार के लिए भेजने को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की मंजूरी हासिल है. साथ ही पत्र में यह भी कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट में लंबे समय से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का प्रतिनिधित्व नहीं है.


प्रसाद ने पत्र में कहा, ‘इस मौके पर जोसफ की सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के तौर पर नियुक्ति का प्रस्ताव उचित नहीं लगता है.’ पत्र में कहा गया है, ‘यह विभिन्न हाई कोर्ट के अन्य वरिष्ठ, उपयुक्त और योग्य मुख्य न्यायाधीशों और वरिष्ठ न्यायाधीशों के साथ भी उचित और न्यायसंगत नहीं होगा.’ सरकार ने कहा कि यह प्रस्ताव शीर्ष अदालत के मापदंड के अनुरूप नहीं है और सुप्रीम कोर्ट में केरल का पर्याप्त प्रतिनिधित्व है, न्यायमूर्ति जोसेफ केरल से आते हैं.




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